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International rights groups are raising the alarm about secret detentions in Ukraine. Amnesty International and Human Rights Watch together wrote a letter to Ukraine’s military prosecutor informing him about five victims of secret detention  in Kharkiv last month.These groups published a report this summer detailing the use of torture and secret detentions by both the Ukrainian government and the Russia-backed separatist rebels it is fighting in the country's east.The two groups on Monday said that 13 people have been released from a Security Service of Ukraine compound since the report came out. Monday's statement said the release of 13 people "confirms the need to end and investigate these abuses and deliver justice to the victims."

The fighting in eastern Ukraine has killed more than 9,500 people since it began in 2014.

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NNWN / Islamabad, 2016-11-12

पाकिस्तान में पुरुषों के साथ घर में बुरे बर्ताव को रोकने और उनके अधिकारों को लेकर अगले हफ्ते से एक धार्मिक संस्था इस बाबत कानून बनाने की मांग को लेकर ये डिबेट करेगी। कहा जा रहा है कि ये कोशिश महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने वाले एक कानून को कमजोर करने के लिए की जा रही है। बता दें कि पंजाब प्रोविंस में फरवरी में महिलाओं के डोमेस्टिक वॉयलेंस के खिलाफ बिल पास हुआ था, जिसे नेशनल एसेंबली की मंजूरी मिलनी अभी बाकी है।  पाकिस्तानी अखबार, ‘द डॉन’ के मुताबिक कंजर्वेटिव काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (CII) सोमवार से इस मुद्दे पर बहस शुरू करेगी।  सीआईआई मेंबर साहिबजादा जाहिद एम कासमी ने संस्था के चेयरमैन मौलाना मोहम्मद शिरानी ने लेटर लिखकर पुरुषों को घर में होने वाले बुरे बर्ताव से बचाने के लिए कानून बनाए जाने की वकालत की थी। डॉन के मुताबिक, कासमी ने अपने लेटर में कहा है- 'देश में कुछ महिलाएं पुरुषों को टॉर्चर करती हैं और उन्हें घर से निकल जाने के लिए मजबूर करती हैं।'  इस्लाम में पुरुषों को अपने अधिकारों की सुरक्षा करने का हक दिया गया है। 
- कासमी ने काउंसिल ने रिक्वेस्ट की है कि इस मसले पर चर्चा की जाए और पुरुषों के एक प्रोटेक्शन बिल के लिए सिफारिशें की जाएं। महिलाओं को हक है तो पुरुषों को क्यों नहीं?  पुरुषों के अधिकारों का बचाव करते हुए कासमी ने कहा कि कुछ महिलाएं पतियों के खिलाफ हिंसा में अपने रिश्तेदारों की मदद लेती हैं। - 'पंजाब के कई डिस्ट्रिक्ट में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां पुरुषों के हाथों के नाखून खींच लिए गए और उनके पैरों पर भी कई जगह जख्म पाए गए। ये मामले थानों में दर्ज हैं।'- 'अगर पुरुष अपनी पत्नी को घर से बाहर निकालते हैं तो उनके लिए शेल्टर होम्स मौजूद हैं, लेकिन पुरुषों के लिए कोई शेल्टर होम नहीं है।'

NNWN/ Bhopal, 2016-10-13

नशा मुक्त भारत आंदोलन की 2 अक्टूबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई राष्ट्रीय यात्रा का समापन कार्यक्रम डॉ राममनोहर लोहिया क़े महापरिनिर्वाण दिवस के  अवसर पर  भोपाल के गांधी भवन में सम्पन्न हुआ। नशा मुक्त भारत आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक डॉ सुनीलम ने कहा कि सरकार को बिहार की तरह कड़ा कानून बना कर  पीने वाले, पिलाने वाले, बनाने वाले और बेचने वाले सभी के लिए कम से कम 5 साल की सजा तथा 5 लाख जुर्माने का कानून बनाना चाहिए नहीं तो मध्यप्रदेश को अगले 5 साल में उड़ता मध्यप्रदेश बनने से कोई नहीं रोक सकता।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को सभी सांसदों द्वारा गोद लिए गए आदर्श ग्रामों को नशा मुक्त करने तथा नशा मुक्ति करने वाली ग्राम पंचायतों को 1 करोड़ की विकास निधि प्रदान करने की योजना अविलम्ब लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में वे 15 दिसम्बर से फिर प्रदेश के बचे हुए 25 जिलों की यात्रा करेंगे। जिसका समापन समाजवादी चिंतक मां बालेश्वर दयाल के परिनिर्वाण दिवस पर 25 दिसम्बर को बामनिया में होगा।

मेधा पाटकर ने कहा कि मध्य प्रदेश और हर राज्य में शराब और नशे से मुक्ति अगले चुनाव में जरुर मुद्दा बनेगा। मध्य प्रदेश और जिन राज्य की सरकारें लोगों का खून चूसकर अपनी संपत्ति और सरकारें बढ़ा रहे हैं, उनके विकास का ढिंढोरा पीटना खोखला है। उन्हें जनता खासकर महिलाएं सबक सिखाये बिना नहीं रहेंगी। इनसे नर्मदा किनारे नशामुक्ति लाने की बात करना भी ढोंग है। मध्य प्रदेश सरकार न केवल बांध की डूब में पर शराब की डूब में भी डुबा रही है, समूची गाँव और बस्तियों की जनता को। राष्ट्रीय यात्रा का दूसरा दौर 15 से 30 जनवरी के बीच साबरमती आश्रम अहमदाबाद से राजघाट,  दिल्ली तक जाएगा। इसमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात , हरियाणा व दिल्ली राज्य में नशामुक्त भारत आन्दोलन की बात पहुचेगी। 20 से 25 नवम्बर के बीच देशभर के चुने प्रतिनिधियों को, जनसमूह/ संगठन से ज्ञापन देकर संविधान के अनुच्छेद 47 का पालन करने के लिए मनाएंगे या दबाव बनायेंगे। गाँव से राष्ट्रीय स्तर पर संरचना गठित करके यह आन्दोलन महिलाओं की शक्ति और अगुवाई में सशक्त संघर्ष करेगा साथ ही राजनीतिक दलों को मध्य प्रदेश सहित हर राज्य की शासन को चुनौती देगा कि आप शराबबंदी व नशामुक्ति नहीं करेंगे, बिहार जैसा सख्त कानून नहीं लायेंगे, हत्या चालू रखेंगे तो हत्यारे साबित होंगे। आप वोट नहीं पाएंगे।  एड आराधना भार्गव ने कहा कि सरकार संविधान के अनुच्छेद 47 की धज्जियाँ उड़ाते हुए खुलेआम शराब बिक्री कर रही है जो अनैतिक असामाजिक होने के साथ साथ असंविधानिक भी है।