Hindi Section

By Neelam Jeena/12-01-2020

हिंदी साहित्य के प्रख्यात आलोचक डॉ नामवर सिंह द्वारा गठित नारायणी साहित्य अकादमी द्वारा राष्ट्रीय पुस्तक मेले में ८ जनवरी को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
'भारतीय भाषा में बाल साहित्य' विषय पर चर्चा एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। चर्चा के अंतर्गत कई गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। कावय गोष्ठी में कवियों द्वारा अपने विचार कविताओं के माध्यम से रखे।

यशपाल सिंह चौहान,सविता चढ्ढा ,जनार्दन सिंह यादव,बाबा कानपुरी,डा,पुष्पा जोशी, जगदीश मीणा जी, गीतांजलि जी, चंद्रकांता सिधार, असलम बेताब, सरफराज,आरिफ गीतकार,डा, प्रियदर्शनी,मालती मिश्रा आशीष श्रीवास्तव,रीता पात्रा, सुमित भार्गव , खालिद आज़मी देवेंद्र मांझी और अनेक गणमान्य कवि ,शायर एवं साहित्यकारों नेअपनी उपस्थिति दर्ज़ करके कार्यक्रम की गरिमा  को बढ़ाया।अंत में अध्यक्ष पुष्पा सिंह विसेन ने सभी का धन्यवाद किया। इस आयोजन के दौरान सभी गणमान्य अतिथियों को अकादमी द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 

NNW/30-08-2019

टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के द्वारा नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर जी के द्वारा नर्मदा किनारे छोटा बड़दा में जारी "नर्मदा चुनौती अनिश्चितकालीन सत्याग्रह" के समर्थन में मुख्यमंत्री कमलनाथ को कलेक्टर सीधी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। मेधा पाटकर द्वारा सत्याग्रह आंदोलन सरदार सरोवर में 192 गांव और एक नगर को बिना पुनर्वास डूबाने की केंद्र और गुजरात सरकार के विरोध में किया जा रहा है | सरदार सरोवर बांध से प्रभावित 192 गांव और एक नगर में 32,000 परिवार निवासरत है ऐसी स्थिति में बांध में 138.68 मीटर पानी भरने से 192 गांव और 1 नगर की जल हत्या होगी | आज बांध में 134 मीटर पानी भरने से कई गांव जलमग्न हो गये हैं हजारों हेक्टर जमीन डूब गई है जिनका भी सर्वोच्च अदालत के फैसले अनुसार 60 लाख रूपये मिलना बाकी है कई घरों का भू - अर्जन होना बाकी है और ऐसी स्थिति में लोगों को बिना पुनर्वास डूबाया जा रहा है। नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर के हजारों विस्थापित परिवार, गांव अमानवीय डूब का सामना कर रहे है। गुजरात और केंद्र शासन से ही जुड़े नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने कभी न विस्थापितों के पुनर्वास की, न ही पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की परवाह की है न ही सत्य रिपोर्ट या शपथ पत्र पेश किये है। हजारों परिवारों का सम्पूर्ण पुनर्वास भी मध्य प्रदेश में अधूरा है, पुनर्वास स्थलों पर कानूनन सुविधाएँ नही है। ऐसे में विस्थापित अपने मूल गाँव में खेती, आजीविका डूबते देख संघर्ष कर रहे है। ऐसे में आज की मध्य प्रदेश सरकार लोगो का साथ कैसे छोड़ सकती है। मघ्यप्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण को भेजे गये 27.05.2019 के पत्र अनुसार 76 गांवों में 6000 परिवार डूब क्षेत्र में निवासरत है। 8500 अर्जियां तथा 2952 खेती या 60 लाख की पात्रता के लिए अर्जियाँ लंबित है। गांवो में विकल्प में अधिकार न पाये दुकानदार, छोटे उद्योग, कारीगर, केवट, कुम्हार को डूब में लाकर क्या इन गांवों की हत्या करने जैसा नही है? इसीलिए किसी भी हालत में सरदार सरोवर में 122 मी. के उपर पानी नहीं रहे, यह मध्य प्रदेश सरकार को देखना होगा। जिसके लिये नर्मदा बचाओं आंदोलन की नेता मेधा पाटकर द्वारा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की जा रही है। ज्ञापन पत्र सौप कर कमलनाथ सरकार से अपेक्षा की गई है कि तुरंत संवेदनशील युध्द स्तरीय, न्यायपूर्ण निर्णय और कार्यवाही करे।

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NNWN/28-12-2019

Mumbai based Swades Foundation which is committed to provide Drinking Water facility in the houses of poor and needy, has provided potable water through tap in 124 houses in rural Maharashtra on Saturday. Rohinton Soli "Ronnie" Screwvala an entrepreneur and philanthropist, in a tweet stated it. He stated that his organization Swades Foundation has been working on providing potable water through taps in each home. Swades Foundation has provided the drinking water facility in more than 40,000 homes in 2019 alone.

Swades Foundation has been trying to provide Drinking Water facility in rural homes for the last five years. Ronnie Screwvala and his wife Zarine Screwvala founded  Swades Foundation in 2013. Swades Foundaiton has a mission to empower rural lives through a unique 360-degree development model which covers four key thematic areas namely Health & Nutrition, Education, Water & Sanitation and Economic Development.

It may be mentioned here that Swades shares the name with famous Bollywood film, Swades released in 2004. The film focused on how an NRI Mohan Bhargava (played by Shah Rukh Khan) returns to India and is inspired by the harsh realities faced by the people in his village to become an agent of change.